"रिश्तों की कहानी, कविता की जूबानी"
"रिश्तों की कहानी, कविता की जुबानी"
कुछ रिश्ते कितने बेपरवाह से होते हैं।
कुछ रिश्ते कितने लापरवाह से होते हैं।
कुछ रिश्ते प्यार से सराबोर हैं।
कुछ में एक अजीब सी कशिश हैं।
कुछ रिश्ते कितने लापरवाह से होते हैं।
कुछ रिश्ते प्यार से सराबोर हैं।
कुछ में एक अजीब सी कशिश हैं।
कहीं एक बेखौफ़ सी समझदारी हैं।
कहीं रिश्ते घसीटने की लाचारी हैं।
कहीं रिश्ते घसीटने की लाचारी हैं।
कुछ रिश्ते होली की रंग बिरंगी गुलाल हैं।
तो कुछ में ना हड्डी न खाल है।
तो कुछ में ना हड्डी न खाल है।
कुछ रिश्ते बस अवशेष बनकर रह गए हैं।
कुछ मातम के बाद के सन्नाटे से शेष रह गए हैं।
कुछ मातम के बाद के सन्नाटे से शेष रह गए हैं।
कुछ रिश्ते किचड़ में खिले कमल से हैं।
तो कुछ कांटों भरे गुलाब से हैं।
तो कुछ कांटों भरे गुलाब से हैं।
कहीं चूड़ियों की खनक से हैं रिश्ते।
कहीं चाहतों की सनक से हैं रिश्ते।
कहीं चाहतों की सनक से हैं रिश्ते।
कहीं पूनम की सर्द रात से हैं ये रिश्ते।
कहीं जेठ की तपती धूप से ये रिश्ते।
कहीं जेठ की तपती धूप से ये रिश्ते।
कभी नर्म दूब से कोमल ये रिश्ते।
कभी नुकिली शूल हो जाएं ये रिश्ते।
कभी नुकिली शूल हो जाएं ये रिश्ते।
कभी नर्म तकिये से हो जाएं ये रिश्ते,
कभी सख्त, पत्थर से हो जाएं ये रिश्ते।
कभी सख्त, पत्थर से हो जाएं ये रिश्ते।
सच है, पर कितनी अजीब है,
ये रिश्तों की कहानी, कविता की जुबानी।
ये रिश्तों की कहानी, कविता की जुबानी।
नीरज'नील'
17-05-2018
17-05-2018
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