किसने देखा है....
किसने देखा है....
(पता नहीं कि मेरे मन में ये भाव क्यों आए। मैं स्वयं स्तब्ध हूं।)
किसने देखा है मौत के बाद का मंजर,
जिसमें होती हैं, नम आंखों से बहती आंसुओं की नदियां।
किसने देखी है, उसके बाद बुझते दिये सी भभकती जिन्दगियां।
किसने देखी है, उसके बाद लोगों के बीच होती सुगबुगाहट।
किसने सुनीं हैं, लोगों के स्वरों से बरसती वो सांत्वना भरी ध्वनियां।
किसने देखे हैं, विरह की तड़पन में बिलखते वो चंद लोग।
किसी के जाने के बाद किसी का टूटता संसार, किसने देखा है।
किसने महसूस किया है, कुछ रिश्तों की अहमियत का बढ़ता-घटता स्वरुप।
जिसमें होती हैं, नम आंखों से बहती आंसुओं की नदियां।
किसने देखी है, उसके बाद बुझते दिये सी भभकती जिन्दगियां।
किसने देखी है, उसके बाद लोगों के बीच होती सुगबुगाहट।
किसने सुनीं हैं, लोगों के स्वरों से बरसती वो सांत्वना भरी ध्वनियां।
किसने देखे हैं, विरह की तड़पन में बिलखते वो चंद लोग।
किसी के जाने के बाद किसी का टूटता संसार, किसने देखा है।
किसने महसूस किया है, कुछ रिश्तों की अहमियत का बढ़ता-घटता स्वरुप।
(और भी बहुत कुछ है लेकिन किसी के अलग होने के दुःख को व्यक्त करने के लिए इतना ही काफी है।)
नीरज'नील'
29-05-2018
29-05-2018
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