घर क्या है.......

घर क्या है .........
आत्मा का ताप है।
संस्कार है।
प्यार है।
जिजीविषा है।
ललक है।
महक है बचपन की।
आँगन है खेल का।
एक बड़ा आगे
पीछे चलती रेल का।
खेल खेल और खेल का।
खिलखिलाती धूप है।
ठण्ड में आराम देता अलाव है।
कभी जीवन का गिरना
तो कभी जीवन का उठाव है।
घर क्या है-
होली का रंग है।
जीने का ढंग है।
मौसम की मार है।
कभी तपती धूप में
बारिश की शीतल बौछार है।
घर क्या है
क्या नहीं है
कहना मुश्किल है।
घर ये है
घर वो है।
घर सब कुछ है।
हाँ,सच!
घर सब कुछ है।
नीरज "नील"
06-02-2016

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