"कितने सुंदर लगते हैं"

गीत
("पार्वती" नदी के तट पर बैठे-बैठे जन्मा ये गीत परमपिता परमेश्वर को समर्पित है जिन्होंने मुझे यह सब अनुभव करने का सौभाग्य प्रदान किया।)
नीरज'नील'
"कितने सुंदर लगते हैं"
कल-कल बहती है ये नदियां
कितनी सुंदर लगती हैं।।
प्यारे- प्यारे हैं ये नजारे
कितने सुंदर लगते हैं।।
देवदार और चीड़ यहां पर
कितने सुंदर लगते हैं।।
ऊंचे-ऊंचे हैं पहाड़ ये
कितने सुंदर लगते हैं।।
ढ़के बर्फ से है पहाड़ ये
कितने सुंदर लगते हैं।।
मनमोहक है ये हरियाली
कितनी सुंदर लगती है।।
नदियों के ये घाट- किनारे
कितने सुंदर लगते हैं।।
जलधारा से हुए ये चिकने पत्थर
सुंदर लगते हैं।
नीरज'नील'
24-05-2018

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