मोबाईली दुनिया
आज की कविता
(बस मोबाईली दुनिया पर पिता जी की व्यंग्योक्तियों को कविता में ढाला है। आज सुबह की ताज़ा, सत्य घटना पर आधारित।)
(बस मोबाईली दुनिया पर पिता जी की व्यंग्योक्तियों को कविता में ढाला है। आज सुबह की ताज़ा, सत्य घटना पर आधारित।)
"फोन होते तो"
भाई का फोन बजते ही
पिता जी ने मां से कहा
"काश हमारे जमाने में भी ऐसे फोन होते,
तो हम भी बातें करते और तुम भी बातें करते।
हम तुमको देखा करते,
तुम हमको देखा करते।
विडियो कोलिंग करते,
व्हाट अप पर चेटिंग करते।
हम भी सेल्फी लेते
और तुम भी सेल्फी लेते।
तुम फोटो शेयर करते,
हम फोटो शेयर करते।
तुम भी सज-धज कर रहते,
हम भी सज-धज कर रहते।
हम खूब दिखाया करते
तुम खूब दिखाया करते।
पिता जी ने मां से कहा
"काश हमारे जमाने में भी ऐसे फोन होते,
तो हम भी बातें करते और तुम भी बातें करते।
हम तुमको देखा करते,
तुम हमको देखा करते।
विडियो कोलिंग करते,
व्हाट अप पर चेटिंग करते।
हम भी सेल्फी लेते
और तुम भी सेल्फी लेते।
तुम फोटो शेयर करते,
हम फोटो शेयर करते।
तुम भी सज-धज कर रहते,
हम भी सज-धज कर रहते।
हम खूब दिखाया करते
तुम खूब दिखाया करते।
(सबसे अहम पंक्तियां)
ग़र फोन जो ये तब होते
तो प्यार ना इतना होता।
तो सिर्फ दिखावा होता,
तो सिर्फ दिखावा होता।
तो प्यार ना इतना होता।
तो सिर्फ दिखावा होता,
तो सिर्फ दिखावा होता।
ना वैसे रिश्ते होते,
ना वैसे नाते होते।
ना इंतजार वो होता,
ना ही खुमार वो होता।
ना आंखों से आंखें मिलती,
ना वो प्यारी बातें होती।
ना वैसे नाते होते।
ना इंतजार वो होता,
ना ही खुमार वो होता।
ना आंखों से आंखें मिलती,
ना वो प्यारी बातें होती।
अच्छा है ना वो (फोन) था तब,
अच्छा हो ना होता वो (फोन) अब।
अच्छा हो ना होता वो (फोन) अब।
वो प्यार तो बच जाएगा,
वो बातें बच जाएंगी,
जो घंटों हुआ करती थी,
कांधे पर सर रख कर तेरे,
हाथों में हाथों को डाले।
वो बातें बच जाएंगी,
जो घंटों हुआ करती थी,
कांधे पर सर रख कर तेरे,
हाथों में हाथों को डाले।
फोनों वाली दुनिया छोटी,
छोटे होते रिश्ते-नाते।
कुछ दूर करो इन फोनों को,
जिनसे दुनियादारी छूटी,
छूटे सारे रिश्ते-नाते,
छूटी अपनी सच्ची यारी।
छोटे होते रिश्ते-नाते।
कुछ दूर करो इन फोनों को,
जिनसे दुनियादारी छूटी,
छूटे सारे रिश्ते-नाते,
छूटी अपनी सच्ची यारी।
नीरज'नील'
03-06-2018
03-06-2018
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