" याद है मुझे "

श्रृंगार रस में एक छोटा सा प्रयास है।
आपके सुझाव सादर आमंत्रित हैं।
" याद है मुझे "
रोज तेरी यादों का तकिया लगा कर सोता हूं मैं,
कभी-कभी तेरी यादों के साये में ढलती है रातें मेरी,
तेरा स्पर्श सर्दी की नर्म धूप का एहसास कराता है कभी,
तेरे चेहरे की चमक देखकर खिल उठता है मन मेरा।
तेरी उंगलियों में उंगलियां फंसाकर वो घंटों बैठना याद आता है मुझे।
तेरी गर्म सांसों का एहसास अब भी हुआ करता है मुझे।
तेरी नर्म उंगलियों का पीठ पर धीरे-धीरे छूआना याद है मुझे।
तेरा हर लफ्ज़ एक कहानी सा लगता है मुझे।
तेरी मीठी बोली का कानों में अमृत घोलना याद है मुझे।
मेरे कांधे पे सर रख कर तेरा समर्पण याद है मुझे।
तेरी हर बात, हां हर एक बात याद है मुझे।
नीरज'नील'
11-05-2018

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