"पर्वतों के रास्ते"

गीत
"पर्वतों के रास्ते"
पर्वतों के रास्ते पे चल रहा हूं मैं
इस नदी की धार में भी बह रहा हूं मैं।
मुझको है मिली घड़ी ये
हूं खुशनसीब मैं।
इस जहां से उस जहां में
ढल गया हूं मैं।
पर्वतों के रास्ते पे चल रहा हूं मैं
इस नदी की धार में भी बह रहा हूं मैं।
हिमशिखर की बर्फ सा
पिघल रहा हूं मैं।
हमसफ़र के संग में जी रहा हूं मैं
इन घटाओं, वादियों को पी रहा हूं मैं।
मस्त हो के मस्तियों में खो गया हूं मैं।
नीरज'नील'
24-05-2018

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