"बिन पानी सब सून"।

"बिन पानी सब सून"।
पानी की कहानी भी बड़ी अजीब है।
पानी है तो सब सजीव है।
कहा जाता है कि जल ही जीवन है।
जल है तो कल है।
समय ने बार-बार चेताया,
लेकिन "समझदार" मनुष्य समझ ना पाया।
अब स्थिति विकट हो चली,
"समझदार" मनुष्य के जीवन में मची खलबली।
अब तो हुजूर पानी की लड़ाई होती है,
पानी के सरकारी नलों पर कितनी महिलाएं
बेचारी लड़-झगड़कर कर इज्ज़त खोती हैं।
चाहे महाराष्ट्र हो या राजस्थान सब सूखा प्रभावित है।
जल तो है नहीं, सब गर्मी से आप्लावित हैं।
अब समय फिर से आइना दिखा रहा है,
कहीं किसान की मौतें,
तो कहीं पशुओं की मौतें,
"बेचारा" पानी भी अपनी मजबूरी जता रहा है।
संभलो, संभालो, अब भी बचा लो।
"बिन पानी सब सून"।
नीरज 'नील'
06-06-2019

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